यह कविता “मैं कृष्ण हूँ” भगवान श्रीकृष्ण के बहुआयामी स्वरूप, उनकी लीला, और जीवन के हर पहलू में उनकी उपस्थिति को दर्शाती है। इसमें आप पाएंगे कृष्ण जन्माष्टमी के लिए सर्वश्रेष्ठ कविता, भगवान कृष्ण पर हिंदी कविता, कृष्ण लीला पर कविताएं, और राधा कृष्ण भक्ति कविता का अद्भुत मेल। कविता में माखन चोर से सारथी तक, द्रौपदी के चीर से युद्ध के योद्धा तक, कृष्ण के हर रूप को जीवंत किया गया है। इसमें कृष्ण के बाल रूप की ममता, अर्जुन का विश्वास, दुर्योधन का विनाश, गोकुल की गलियां, और महाभारत का युद्ध — सबको कवि ने शब्दों में पिरोया है। यह कविता Janmashtami special Hindi poetry, Krishna Bhakti poetry in Hindi, और भगवान कृष्ण की प्रेरणादायक पंक्तियां खोजने वालों के लिए एक अनमोल रचना है। इसमें कृष्ण के जीवन से प्रेरणा, भक्ति और प्रेम का संदेश, और आध्यात्मिकता के सुंदर भाव समाहित हैं। अगर आप भगवान कृष्ण के भक्ति गीत, भजन, और कविताओं के प्रेमी हैं, तो यह कविता आपको राधा-कृष्ण के प्रेम और श्रीकृष्ण के दिव्य स्वरूप के निकट ले जाएगी।
मैं ऐसी कविताएं लिखता रहता हूँ। मैंने और भी कविताएं लिखी हैं, जिन पर लोगों ने बहुत प्यार बरसाया है — जैसे हनुमान जी पर कविता, सरस्वती माता पर कविता, राधा अष्टमी पर कविता, शिव जी पर कविता और कई अन्य भक्ति कविताएं।— अगर आपको अच्छी लगती हैं, तो मेरे साथ जुड़ जाइए इस सफ़र में।
🌸 “मैं कृष्ण हूँ” – “Main Krishna Hoon” Best Hindi Poetry
कभी माखन चोर, कभी सारथी,
कहीं निर्बल, कहीं महारथी,
कहीं गौ-बालक, कहीं बालक हूँ —
मैं कृष्ण हूँ, मैं कृष्ण हूँ।
मैं द्रौपदी की चीर हूँ,
मैं आँसुओं की नीर हूँ,
कहीं निर्बल, कहीं मैं वीर हूँ,
मैं हर धनुष का तीर हूँ।
कहीं साँवला, कहीं सफेद हूँ,
हर मन में छिपा मैं भेद हूँ,
कहीं आस, कहीं उम्मीद हूँ —
मैं कृष्ण हूँ, मैं कृष्ण हूँ।
मैं युद्ध हूँ, मैं योद्धा हूँ,
मैं स्वतंत्र, मैं ही बंधा हूँ,
मैं रुक्मिणी, मैं राधा हूँ,
मैं पूरा हूँ, मैं आधा हूँ।
कहीं दुर्योधन का विनाश हूँ,
कहीं अर्जुन का विश्वास हूँ,
मैं रक्त मैं ही श्वास हूँ —
मैं कृष्ण हूँ, मैं कृष्ण हूँ।
मैं त्रेता हूँ, मैं द्वापर हूँ,
जहाँ पुकारो, मैं वहाँ पर हूँ,
मैं नदी में ही सागर हूँ,
मैं घड़ा, मैं ही गागर हूँ।
मैंने जन्म लिया, मैं अजर हूँ,
मैं मिट चुका, मैं अमर हूँ,
मैं हर चक्षु की नज़र हूँ —
मैं कृष्ण हूँ, मैं कृष्ण हूँ, मैं कृष्ण हूँ।
🌸 Main Krishna Hoon- Best Hindi Poetry In Hinglish
Kabhi makhan chor, kabhi saarathi,
Kahin nirbal, kahin maharathi,
Kahin gau-balak, kahin balak hoon —
Main Krishna hoon, main Krishna hoon.
Main Draupadi ki cheer hoon,
Main aansuon ki neer hoon,
Kahin nirbal, kahin main veer hoon,
Main har dhanush ka teer hoon.
Kahin saanwala, kahin safed hoon,
Har man mein chhupa main bhed hoon,
Kahin aas, kahin ummid hoon —
Main Krishna hoon, main Krishna hoon.
Main yuddh hoon, main yoddha hoon,
Main swatantr, main hi bandha hoon,
Main Rukmini, main Radha hoon,
Main poora hoon, main aadha hoon.
Kahin Duryodhan ka vinaash hoon,
Kahin Arjun ka vishwas hoon,
Main rakt, main hi shwaas hoon —
Main Krishna hoon, main Krishna hoon.
Main Treta hoon, main Dwapar hoon,
Jahan pukaro, main wahan par hoon,
Main nadi mein hi saagar hoon,
Main ghada, main hi gaagar hoon.
Maine janm liya, main ajar hoon,
Main mit chuka, main amar hoon,
Main har chakshu ki nazar hoon —
Main Krishna hoon, main Krishna hoon, main Krishna hoon.
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