भारतीय जवानों के लिए समर्पित
मेरी ये कविता जरा ध्यान से सुनना के
निकले हैं जब घर से तो माँ की आँख में आँसू हैं
पापा का दिल डरता है कुछ अनचाही सी बातों से
बहनें भाई सब को छोड़ा और आगे पड़ा बढ़ना है
हाँ हमने भी तो देश के लिए कुछ तो कर गुजरना है
नए नए से लोग मिले अब उनसे सारी बातें हैं
दिन गुज़रे तो मौत हथेली, आखिरी मानों रातें है
कभी सर्द पहाड़ जंजाल हैं, पर्वत नदी मैदान हैं
हम डरे नहीं हैं प्राण से और भिड़ने चले हैं
काल से जो साथ थे उन्हें खोया भी दिल बांधा
भी और रोया भी
जिम्मेदारियों का बोझ भारी था
उठाया भी और ढोया भी
घर की याद भी आयी है, हमारी भी तो माई है
हमने कहाँ उड़ाई है जो भी दौलत कमाई है
गोलियों की अब चादर है और बंदूकों की रज़ाई है
घड़ी घड़ी का पहरा देते कितनी नींदे गंवाई है
हर त्यौहार ही ड्यूटी है फोन भी ज़ब्त हो जाते हैं
घर में सब ठीक तो होंगे ये सोचते रह जाते हैं
अर्से बाद जब लौटते हैं सारा नक्शा ही बदला है
हम गाँव से निकले हैं, पर गाँव दिल से नहीं छूटा है
फिक्र सताये बच्चों की कभी पत्नी की कभी
अपनों की
फिर भी देश को पहले रखे परवाह ना करें हम सपनों की
हमने उठाई अर्थीयां और गलती देखी अस्तियां
फिर भी Hero के नाम से मशहूर हो गयी हस्तियाँ
हर रात गुज़री पहरे में, कभी गर्मी में कभी कोहरे में
ग़म के काले अंधेरे में और सिमटे हुए से कोने में
हमने किया संघर्ष कठिन, परिवार नहीं देश चुना
फिर भी छुट्टियों के नाम पर बस पल दो पल का वक़्त मिला
मृत्यु निहारे घड़ी घड़ी फिर भी शिकायत ना एक करी
जिए आजीवन देश खातिर और मरेंगे भी इस देश पर ही
खुद की मृत्यु का भय नहीं जो राग जीत के गाते है
जिनके बुलंद हौंसले देख पर्वत भी झुक जाते हैं
जिनके होने से महफ़ूज़ समूचा हिन्दुस्तान है
वो हमारा अभिमान है, हां वही भारतीय जवान है
😊❤️👏
