इस साल 2023 में जुलाई अगस्त के माह में हुई भीषण त्रासदी पर लिखी मेरी ये कविता पूरे हिमाचल में सुनी गई. “बोल हिमाचल क्या देखा” मात्र एक कविता नहीं सच्चाई है आईना है सरकारों के लिए, इंसानों के लिए और प्रकृति के लिए. इस कविता ने देश भर से करोड़ों तालियाँ बटोरी करोड़ों ही लोगों ने इस वीडियो को देखा और शेयर भी किया.
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बोल हिमाचल क्या देखा?
बोल हिमाचल क्या देखा?
यमुना का तांडव प्रलय देखा
आधुनिकता का जल में विलय देखा
उफान पे देखी ब्यास नदी
महादेव डटे रहे देखा
देखा सरकारों का काम-काज
देखा बहता सब ठाठ-बाठ
सच्चाई का खूब आईना देखा
तू बोल हिमाचल क्या देखा?
बहती फिर जिंदगियां देखी
देखे मकान गाडिय़ां देखी
देखी तरक्की पहाड़ों की
और दरकती पहाडिय़ां देखी
देवभूमि का रौद्र रूप देखा
पंचवक्त्र का स्वरूप देखा
थरथराती हुई भू देखी
मृत्यु देखी यमदूत देखा
क्या अब भी तरक्की चाहते हो
पहाड़ों को काट-काट कर तुम
क्या अब भी पाप फैलाओगे
पहाड़ों की बाट-बाट पर तुम
क्या अब भी बेशर्मी बाकी है
क्या अब भी जंगल जलाओगे
क्या अब भी सुकून की तलाश में
पहाड़ों पर गंद फैलाओगे
क्या अब भी सुविधाएं चाहते हो
हर छोटी-छोटी चीज को
क्या अब भी एनएच बनाओगे
बढ़ाने गाड़ी की स्पीड को
पहाड़ों में सुविधाएं बहुत हैं
ये कब तुम समझ पाओगे
कब तक धराशायी होते
बेबाक मकान बनाओगे
अभी भी वक्त बहुत है
सुधरने बोलो सरकारों को
जो सीना चीर के मिलता हो
वो टूरिज्म नहीं चाहिए पहाड़ों को
वो टूरिज्म नहीं चाहिए पहाड़ों को.

Osm